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Khaana

Writer: Shradha Bhatia
Shradha Bhatia
May 6, 2022
1 min read

बहुत दिन हो गये, खाना नहीं बनाया। पर आज मन कर आया की उन अधपके चावलों में थोड़ी सी सोया सॉस डाल दूँ। एक इच्छा थी, की कोई बात नहीं किसी और के लिए नहीं तो अपने लिए बना ले। उस दिन जब तुम्हारे बारे में लिख रही थी, तो एक भाव में अपना खाना तुम्हारे नाम कर दिया; बुरा भी नहीं लगा, बस कर दिया। अब वापिस अपने नाम करना पड़ रहा है। मन नहीं है पर करना पड़ेगा, वक्त लगेगा। सोचा है दोबारा किसी को नहीं दूँगी। हिम्मत नहीं है। शायद वसीयत में अगली पीडी के नाम कर दु… मेरी या किसी और की, नहीं पता। होश में नहीं आने देती खुद को मैं, टूट जाऊँगी। और टूटना बर्दाश्त नहीं होगा। jenga की तरह चल रही है फ़िलहाल ज़िंदगी। बोहोत चीजों ने तोड़नी की कोशिश की है मुझे, तो इश्क़ तो मेरी सबसे प्रिय चीज़ है… इश्क़ से नहीं टूटना।



 
 
 

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